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विध के अंतर्गत हिंदू धर्म से जुड़े कुछ अन्य विषयों के लिन्क यहां प्रस्तुत हैं जिन पर हम आलेख प्रस्तुत कर चुके हैं-
महालय पर श्राद्ध करने का एवं पितृपक्ष का महत्व
स्वप्नों का रहस्य
'श्री नृसिंह-छिन्नमस्ता-शरभ जयंती' से 'हमारा हिन्दू धर्म व इससे जुड़ी मान्यताएँ' ब्लॉग का शुभारंभ हुआ था।
महालय पर श्राद्ध करने का एवं पितृपक्ष का महत्व
स्वप्नों का रहस्य
'श्री नृसिंह-छिन्नमस्ता-शरभ जयंती' से 'हमारा हिन्दू धर्म व इससे जुड़ी मान्यताएँ' ब्लॉग का शुभारंभ हुआ था।
स्वामीजी नमस्कार🙏🏻
जवाब देंहटाएंमेरा नाम रोहित कुमार सिंह है
मैं बहुत समय से माता का अनुष्ठान करना चाह रहा था परन्तु सही मार्गदर्शन का अभाव था ।
माता की कृपा से मुझे आपका blog मिला जिससे मुझे अनुष्ठान की सही सरल जानकारी मिली है
मैंने शारदीय नवरात्र में अनुष्ठान प्रारम्भ कर दिया है
अतः मैं आपसे यह मार्गदर्शन चाहता हूँ कि जो कलश नारियल हम नवरात्र में स्थापित करते हैं उसे नवरात्र पूर्ण होनेवर विसर्जित करना है या अनुष्ठान पर्यन्त रखना है
और सात्विक बलि विशेष के लिए यही नारियल रहेगा या दूसरा ले कर सात्विक बलि के प्रयोग में लाएं
कृपया मार्गदर्शन करें
आपकी अतिकृपा होगी
प्रणाम
नमस्कार, आपसे भगवती अनुष्ठान करवा रही हैं इस हेतु शुभकामनाएं..नवरात्र में प्रतिपदा में स्थापित कलश तो नवरात्रि के पूर्ण होने पर विसर्जित करना ही होगा और अनुष्ठान चलता रहे...वैसे तो सात्विक बलि के लिए नया नारियल लेना उचित है... लेकिन कलश वाले नारियल को भी विसर्जन करने के बाद ही प्रयुक्त कर सकते हो...बलिदान के लिए नारियल को तोड़कर आधा देवी के लिए प्रसाद अर्पित करे और आधा स्वयं लेले उस नारियल के जल से देवी का अभिषेक करे..
हटाएंजय माँ दुर्गा
आचार्यवर प्रणाम 🙏🏻
हटाएंकोटि धन्यवाद
आपने प्रश्न का निवारण कर मझे कृतार्थ किया
आपसे एक आग्रह और है कि आप पूर्णिमा व्रत विधि विधान समझाने की कृपा करें
कि किसी विधि विधान से पूर्णिमा व्रत किया जा सकता है
आप मुझे पूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करें
आपकी अति कृपा होगी
प्रणाम आचार्य🙏🏻
महोदय अभी व्यस्तता अधिक है इसलिए नया लेख लिख नहीं पा रहा ... पूर्णिमा पर भी अवश्य जानकारी प्रस्तुत होगी पर इसमें कुछ समय लग ही जाएगा ...
हटाएंजय श्री कृष्ण
जी
हटाएंआपका धन्यवाद🙏🏻