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कमला महाविद्या की स्तोत्रात्मक उपासना

भक्त

गवान और भक्त का संबंध कभी नहीं टूटता यह तो आत्मा व परमात्मा का नाता है जो जन्म जन्मांतर तक बना रहता है। हमको पूर्वजन्मों की स्मृति नहीं रहती परंतु परमेश्वर सब जानता है। भगवान से भक्त की भक्ति छिपी नहीं है परंतु बहुत से मनुष्य उस भक्त भगवान के नाते को भुलाए बैठे हैं।
हमारे सनातन इतिहास में अनेकों भक्तों उपासकों का वर्णन मिलता है जिनकी भक्ति अद्भुत व  प्रेरक रही है। प्रस्तुत स्तंभ में उन भक्तों, उपासकों या साधक, ऋषि-मुनि, साधु-सन्तों से आपका परिचय करवाने का प्रयास रहेगा।

देवर्षि नारद - भक्ति का सही अर्थ समझाने में समर्थ धर्म-प्रचारक एवं भगवान के मन। 


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