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मारे हिन्दू धर्मग्रंथों में अनेकों कथाएं मिलती हैं। वेदों-उपनिषदों में, विशेषकर पुराणों में हमारी सनातन संस्कृति से जुड़ी अनेकों कथाएं प्राप्त होती हैं। ये हमारे ऋषि मुनियों से जुड़ी सत्य कथाएं हैं जो अतीत में घटित हुई थीं। इस ब्लॉग के माध्यम से हमने बहुत सी कथाएं प्रस्तुत की हैं जिनकी सूची निम्न प्रकार है-
श्री गणेश चतुर्थी की रात्रि को चन्द्रमा को न देखें अगर भूलवश चंद्रदर्शन हो जाय तो पढ़ें यह स्यमन्तक मणि का अपकीर्तिनाशक आख्यान
श्री जानकीनवमी व्रत कथा
विश्व-संस्कृति के रक्षक व प्रतिष्ठापक श्री मत्स्य भगवान की कथा
आमलकी एकादशी की पावन कथा
श्री महा त्रिपुरसुन्दरी ललिता माँ के प्रादुर्भाव की कथा
ज्ञानदायिनी सरस्वती माँ की अवतार कथा
भगवान कालभैरव की कथा
गोवत्स द्वादशी व्रत कथा
रमा एकादशी कथा
करवाचौथ
श्री नृसिंह-चतुर्दशी व्रत कथा
भगवान परशुराम अवतार कथा
यहां प्रकाशित सभी कथाओं को क्रमवार पढ़ने के लिये आप इस - "कथा" लिन्क पर जाकर भी देख सकते हैं और हमारा फेसबुक पन्ना भी पसंद कर सकते हैं...
श्री गणेश चतुर्थी की रात्रि को चन्द्रमा को न देखें अगर भूलवश चंद्रदर्शन हो जाय तो पढ़ें यह स्यमन्तक मणि का अपकीर्तिनाशक आख्यान
श्री जानकीनवमी व्रत कथा
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आमलकी एकादशी की पावन कथा
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कृपया टिप्पणी करने के बाद कुछ समय प्रतीक्षा करें प्रकाशित होने में कुछ समय लग सकता है। अंतर्जाल (इन्टरनेट) पर उपलब्ध संस्कृत में लिखी गयी अधिकतर सामग्री शुद्ध नहीं मिलती क्योंकि लिखने में उचित ध्यान नहीं दिया जाता यदि दिया जाता हो तो भी टाइपिंग में त्रुटि या फोंट्स की कमी रह ही जाती है। संस्कृत में गलत पाठ होने से अर्थ भी विपरीत हो जाता है। अतः पूरा प्रयास किया गया है कि पोस्ट सहित संस्कृत में दिये गए स्तोत्रादि शुद्ध रूप में लिखे जायें ताकि इनके पाठ से लाभ हो। इसके लिए बार-बार पढ़कर, पूरा समय देकर स्तोत्रादि की माननीय पुस्तकों द्वारा पूर्णतः शुद्ध रूप में लिखा गया है; यदि फिर भी कोई त्रुटि मिले तो सुधार हेतु टिप्पणी के माध्यम से अवश्य अवगत कराएं। इस पर आपकी प्रतिक्रिया व सुझाव अपेक्षित हैं, पर ऐसी टिप्पणियों को ही प्रकाशित किया जा सकेगा जो शालीन हों व अभद्र न हों।