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हि न्दू धर्मग्रंथों के अनुसार , सतयुग , द्वापर , त्रेतायुग बीतने के बाद यह वर्तमान युग कलियुग है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कहे गए कथन के अनुसार- जब जब धर्म की हानि होने लगती है और अधर्म आगे बढ़ने लगता है , तब तब श्रीहरि स्वयं की सृष्टि करते हैं , अर्थात् भगवान् अवतार ग्रहण करते हैं। साधु-सज्जनों की रक्षा एवं दुष्टों के विनाश और धर्म की पुनःस्थापना के लिए श्रीकृष्ण विभिन्न युगों में अवतरित होते हैं और आगे भी होते रहेंगे- यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे॥ कल्कि पुराण में वर्णन है कि चौथे चरण में कलियुग जब अपनी चरम सीमा तक पहुँच जाएगा , तब अपराध-पाप-अनाचार अत्यन्त बढ़ जायेंगे ; अधर्म-लूटपाट-हत्या तो सामान्य बात हो जायेगी यहाँ तक कि लोग ईश्वर-सत्कर्म-धर्म सब भूल जायेंगे। तब भगवान श्रीहरि अ...