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पू जा -विधि अथवा व्रत विधि को पढ़ना मात्र भी आध्यात्मिक लाभ देता है क्योंकि इतने मात्र से भी मन से प्रभु का स्मरण हो जाता है। हिन्दू-समाज में जिस प्रकार श्री राम नवमी का माहात्म्य है , उसी प्रकार श्री जानकी नवमी का भी है। जिस प्र का र अष्टमी तिथि भगवती राधा तथा भग वान श्रीकृष्ण के आवि र्भाव से सम्बद्ध है , उसी प्रकार नवमी तिथि भगवती सीता तथा भगवान् श्रीराम के आविर्भाव की तिथि होने से परमाद रणी या है । जिस प्रकार भगवती रा धा का आविर्भाव भाद्रपद शुक्ल अष्टमी और भग वान श्रीकृष्ण का आविर्भाव भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को अर्थात् दो विभिन्न अष्टमी तिथियों में हुआ , उसी प्रकार भगवती सी ता का आविर्भाव वैशाख शुक्ल नवमी को और भगवान् श्रीराम का आविर्भाव चैत्र शुक्ल न व मी को अर्थात् दो विभिन्न नवमी तिथियों मेँ हुआ। हिंदू- मात्र के परमाराध्य श्रीसीताराम तथा श्रीराधा कृष्ण से सम्बद्ध ये जयन्ती दिवस अति पावन ...