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श्री हनुमान जी की स्तोत्रात्मक उपासना

ग्रहण पंचांग | सूर्य और चंद्र ग्रहण की सही तिथि व समय | Solar & Lunar Eclipse

सूर्य एवं चंद्र ग्रहण पंचांग 2026 — सटीक तिथि, समय व सूतक काल

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) और चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) का विशेष धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व है। ग्रहण काल के दौरान लगने वाला सूतक काल, ग्रहण का स्पर्श, मध्य और मोक्ष समय तथा इसकी दृश्यता (Visibility) का विचार पंचांग के अनुसार करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

नीचे दिए गए इंटरैक्टिव पंचांग में आप अपने स्थान (City) के अनुसार आने वाले सभी सूर्य और चंद्र ग्रहण की सटीक तिथियां, भारतीय मानक समय (IST), सूतक काल तथा पुण्य काल का विवरण देख सकते हैं।

खगोलीय गणना द्वारा ग्रहण एवं सूतक काल लोड हो रहा है...
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साधकों के लिए विशेष जानकारी: ग्रहण पुरश्चरण

ग्रहण काल को तंत्र, योग और मंत्र सिद्धि के लिए अत्यंत 'सिद्ध काल' माना गया है। यदि आप ग्रहण के दौरान साधना या मंत्र जप की योजना बना रहे हैं, तो पुरश्चरण के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

ग्रहण पुरश्चरण: संपूर्ण विधि, नियम एवं मंत्र सिद्धि गाइड पढ़ें ➔

📌 ग्रहण एवं सूतक काल से जुड़े मुख्य नियम (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. सूतक काल कब शुरू होता है?

सूर्य ग्रहण: ग्रहण के प्रथम स्पर्श से ठीक 12 घंटे (4 प्रहर) पहले सूतक काल आरंभ होता है।
चंद्र ग्रहण: ग्रहण के प्रथम स्पर्श से 9 घंटे (3 प्रहर) पहले सूतक काल मान्य होता है।

Q2. क्या भारत में न दिखने वाले ग्रहण का सूतक काल मान्य होता है?

शास्त्रानुसार, जो सूर्य या चंद्र ग्रहण आपके निवास क्षेत्र या देश में दिखाई नहीं देता (Not Visible), उसका धार्मिक प्रभाव और सूतक काल वहां मान्य नहीं होता है। ऊपर दिए गए विजेट में 'दृश्यता' चेक करें।

Q3. सूतक और ग्रहण काल में क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

  • ग्रहण काल में मूर्तियों का स्पर्श न करें और न ही भौतिक पूजा-पाठ करें (मानसिक जाप सर्वश्रेष्ठ है)।
  • सूतक काल शुरू होने से पहले ही भोजन और पीने के पानी में तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) डाल दें।
  • गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल के दौरान नुकीली वस्तुओं (चाकू, कैंची, सुई) के प्रयोग से पूर्णतः बचना चाहिए।
  • ग्रहण समाप्ति (मोक्ष) के बाद स्नान करके दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Q4. क्या ग्रहण काल में मंत्र जाप या साधना करना फलदायी है?

हाँ, ग्रहण काल में किया गया जप अक्षय फल प्रदान करता है। इसे 'पुरश्चरण' और मंत्र जागृत करने का सबसे उत्तम समय माना गया है। विस्तृत जानकारी के लिए ऊपर दिए गए पुरश्चरण गाइड को अवश्य पढ़ें।



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