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नागों की स्तोत्रात्मक उपासना : सर्पभय - सर्प दोष निवारण

ह मारी सनातन परंपरा में नाग केवल भय और रहस्य के प्रतीक नहीं, बल्कि पूज्य देवशक्ति के रूप में प्रतिष्ठित रहे हैं। वेदों से लेकर पुराणों तक, नागों को सृष्टि की रक्षक शक्तियों में गिना गया है — शेषनाग जिन पर स्वयं भगवान विष्णु शयन करते हैं, वासुकि जिन्होंने समुद्र-मंथन में रस्सी का कार्य किया और तक्षक जैसे नाग जिनका उल्लेख महाभारत में मिलता है। इसी आस्था की परिणति है नागपंचमी का पर्व, जब श्रद्धालु नाग देवताओं की स्तुति कर उनसे सुख-समृद्धि और विष-भय से रक्षा की कामना करते हैं। नागवासुकि मंदिर, प्रयागराज


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